मुक्तक

सूरज निकलेगा!

आशा खो गईनिराशा के भंवर मेजिंदगी चलती रहीखोज मेना आदि मेना अंत मेसमय के संयोग मेबेहतरी की आशा मेजिंदगी की निराशा मेहोने या ना होने केभंवर मेकटती जा रही हैंनिराशा बढ़ती जा रही हैंउम्र घटती जा रही हैंदुनिया रो रही हैंपर फिर भीउम्मीदों को ढ़ो रही हैंकिवो दिन फिर आएगाउम्मीद जवान होगींसबका साथ होगाहाथों मे …

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आशा क्या है?

आशा क्या है?वो रूप हैंउस सोच काजो आज सबके मन मे हैंकिहम सबजीतेंगेआगे बढ़ेंगेसामना करेंगेचाहे मुश्किलें हजार होसमुद्र सी विकराल होझुकना नहींरुकना नहींटूटना नहींहटना नहींदीवार हम बन जाएगेमुश्किलों से ना कतराएगेहैं हौसला हम मे अभीकि फिरनया एक दिन आएगाहाथ मे हाथ होगालोगों का भी साथ होगादिन को दूर नहींजबफिर एकनया सवेरा होगा!!

आज

आजतेज हवा के झोंके सेकिताब के पन्ने खुल गयेकुछ एसा दिखाकि ज़ख़्म हरे हो गएयादें जवा हो गईधड़कने तेज हो गईजबमाँ के हाथों से लिखापत्रफिर आखों के सामने आ गयाबचपना याद आ गयावो ड़ाटनावो प्यार करनासुबह सुबह उठनाफिर हमें उठानापहले खुद पढ़नाफिर हमें पढ़ानाज़िन्दगी तो वहीं थीना कोई डरना फ़िकरवो एक शब्दमाँही जिंदगी था!! … …

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